Close

kailash Singh

अभी तक बस दूसरों के समस्या का ही निदान करता रह गया लेकिन उम्र बढ़ने पर होने वाली खुद की समस्या पर कभी विचार ही नहीं किया आज उम्र के इस पड़ाव पर समझ में आ रहा है कि यहां सब अपने लिए ही सोचते हैं दूसरों के लिए कोई संवेदना नहीं होती है बस इसीलिए खुद के बारे में सोचते हुए एक समझदार और संस्कारी साथी की जरूरत महसूस कर रहा हूं जाति से मुझे कोई समस्या नहीं है बस उम्र भर सुकून से साथ देने का भरोसा चाहिए

जाति/समाज स्वर्णकार
उम्र 45
स्थान Uttar Pradesh
वैवाहिक स्थिति Unmarried

Copyright © 2025 Mahadev Rishtey All rights reserved.